जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त के अवसर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग-अलग कार्यक्रम और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के दौरान नेताओं ने अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण और मांगों को जनता के सामने रखा। प्रशासन ने इन आयोजनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी थी, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जिलों में सभाएं, विरोध मार्च और प्रेस वार्ताएं आयोजित कीं। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। कुछ नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी, जबकि अन्य ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और स्थानीय जनता की भावनाओं को प्रमुखता से उठाया।
प्रशासन ने पहले से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की थी। प्रमुख चौक-चौराहों, सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई गई। कई स्थानों पर वाहनों की जांच की गई और स्थिति पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन का भी उपयोग किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। जहां कहीं भी कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी, वहां सुरक्षा बलों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून-व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस दौरान आम लोगों से भी अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई। प्रशासन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य जनजीवन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।