जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस के चिकित्सा प्रशिक्षुओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल शनिवार को छठे दिन भी जारी रही। सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों में कार्यरत प्रशिक्षु चिकित्सक अपने मासिक वजीफे को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। प्रशिक्षुओं का कहना है कि उन्हें वर्तमान में 12,300 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाना चाहिए।
प्रशिक्षुओं ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब सात वर्षों से उनके वजीफे में पर्याप्त संशोधन नहीं किया गया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में बढ़ते काम के बोझ के बीच मौजूदा राशि बेहद कम है। प्रशिक्षु चिकित्सक आपातकालीन सेवाओं, रात की पाली और लंबे समय तक चलने वाली ड्यूटी में भी जिम्मेदारियां निभाते हैं। कई प्रशिक्षुओं के अनुसार, कई बार उनकी ड्यूटी 36 घंटे तक चलती है।
इस मामले को लेकर शुक्रवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू के साथ प्रशिक्षु चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। सरकार ने मांग पर विचार करने के लिए करीब एक महीने का समय मांगा, लेकिन प्रशिक्षु तत्काल लिखित आदेश जारी करने की मांग पर कायम रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रशिक्षुओं की मांग को जायज बताया है, लेकिन साथ ही कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि वजीफा बढ़ाने के प्रस्ताव के वित्तीय प्रभाव पर विचार किया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रशिक्षुओं का कहना है कि उन्हें लंबे समय से आश्वासन मिलते रहे हैं और अब वे स्पष्ट सरकारी आदेश चाहते हैं।
इस आंदोलन को कुछ राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों का भी समर्थन मिला है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी लंबे समय से लंबित मांग को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
हालांकि, हड़ताल के कारण अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की चिंता बनी हुई है। प्रशिक्षु चिकित्सक स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए सरकार के सामने उनकी मांग और मरीजों की नियमित चिकित्सा सेवाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
फिलहाल प्रशिक्षुओं ने साफ कर दिया है कि जब तक 30 हजार रुपये मासिक वजीफे को लेकर लिखित सरकारी आदेश जारी नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी चिकित्सकों के बीच बातचीत इस विवाद के समाधान के लिए महत्वपूर्ण होगी।