लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हाल ही में केंद्र सरकार और लद्दाख के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में क्षेत्रीय पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा हुई।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से ही यहां के स्थानीय संगठन राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के अंतर्गत विशेष प्रावधानों की मांग कर रहे हैं, ताकि भूमि, रोजगार और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
लद्दाख के प्रतिनिधियों का मानना है कि छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदों को अधिक शक्तियां मिलने से स्थानीय स्तर पर शासन व्यवस्था मजबूत होगी और विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि इस मांग से जुड़े सभी संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं का गंभीरता से अध्ययन किया जा रहा है और सभी हितधारकों के साथ संवाद जारी रहेगा।
बैठक के बाद जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया कि इस विषय पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन सरकार क्षेत्र के समग्र विकास और लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बैठकों के आयोजन की संभावना जताई जा रही है, जिससे सभी पक्षों की सहमति से कोई ठोस निर्णय लिया जा सके।