लद्दाख में पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का प्रमुख आधार बनाते हुए इसके टिकाऊ विकास पर विशेष ध्यान देने की तैयारी है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक के. लाहिड़ी ने हाल में लेह में अधिकारियों के साथ बैठक कर पर्यटन, रोजगार, ऊर्जा, जल, संपर्क व्यवस्था और आधारभूत ढांचे से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि लद्दाख की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विरासत, मानव संसाधन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को स्थानीय लोगों के लिए स्थायी आजीविका के अवसरों में बदलने की जरूरत है।
लद्दाख में पर्यटन पहले से ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। प्रशासन के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच यहां 1,17,546 पर्यटक पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 81,827 पर्यटक आए थे। इस तरह पर्यटकों की संख्या में करीब 43.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। घरेलू पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
प्रशासन अब पर्यटन को केवल कुछ महीनों तक सीमित रखने के बजाय पूरे वर्ष सक्रिय रखने की दिशा में काम कर रहा है। धार्मिक, सांस्कृतिक, साहसिक, खेल और खगोलीय पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हानले का अंधेरा आकाश क्षेत्र, बौद्ध विरासत और पर्वतीय पर्यटन लद्दाख को अलग पहचान देने वाले प्रमुख आकर्षण हैं।
पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार को मजबूत करना भी प्राथमिकता है। खुबानी, पश्मीना, हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य पदार्थ और डेयरी जैसे क्षेत्रों को बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। खुबानी के निर्यात के लिए नए बाजार खुलने से किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद है। पश्मीना को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के लिए पश्मीना बोर्ड की स्थापना भी की गई है।
हालांकि, तेजी से बढ़ते पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण बड़ी चुनौती है। लद्दाख की नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी को देखते हुए पानी, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा और यातायात पर संतुलित नीति जरूरी है। नीति आयोग ने भी विकास के साथ पर्यावरणीय स्थिरता और स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देने की बात कही है।
इस तरह लद्दाख में पर्यटन को स्थानीय उत्पादों, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर ऐसी अर्थव्यवस्था विकसित करने की कोशिश हो रही है, जिसका लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।