लद्दाख के जाने-माने शिक्षाविद, पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां केंद्र सरकार ने उनकी हिरासत को लेकर अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि सोनम वांगचुक के कुछ बयानों और गतिविधियों से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र लद्दाख में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता फैलने की आशंका पैदा हुई थी। केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी कि लद्दाख जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था…
Author: Ladakh Samachar
लद्दाख को वर्ष 2026 के लिए भारत के सबसे खास और पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया है। देश-विदेश के ट्रैवल प्लेटफॉर्म और टूरिज़्म विशेषज्ञों के अनुसार, लद्दाख अब सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि “मीनिंगफुल ट्रैवल” यानी प्रकृति, संस्कृति और आत्मिक अनुभव से जुड़ी यात्रा का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। लद्दाख की पहचान उसकी बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ, नीला आसमान, शांत झीलें और अनोखी बौद्ध संस्कृति से है। पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी, त्सो मोरीरी, हेमिस और थिकसे मठ जैसे स्थल पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक…
लद्दाख आज केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और लोकतांत्रिक अधिकारों के संगम का प्रतीक बन चुका है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख लगातार राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। हालिया घटनाक्रम, आंदोलनों और सुप्रीम कोर्ट में उठे सवालों ने यह साफ कर दिया है कि लद्दाख का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नीतिगत और संवेदनशील भी है। एक ओर केंद्र सरकार लद्दाख को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए यहाँ सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। चीन सीमा से सटे इस इलाके में स्थिरता बनाए रखना…
केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई के दौरान कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के कुछ बयानों और गतिविधियों से लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसी राजनीतिक-सामाजिक अस्थिरता (unrest) फैलने की आशंका पैदा हुई। सरकार की ओर से दलील दी गई कि वांगचुक के भाषणों और आंदोलनों का असर खासकर युवाओं पर पड़ा और इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने का खतरा उत्पन्न हुआ। केंद्र ने अदालत को बताया कि लद्दाख एक रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है, जहाँ किसी भी तरह की अव्यवस्था सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हो सकती है।…
लद्दाख में हाल के दिनों में दिखाई देने वाला लाल या सुर्ख आसमान लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे कुदरत की खूबसूरती मान रहे हैं, तो कुछ इसे मौसम में बड़े बदलाव या तूफ़ान का संकेत समझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लाल आसमान का मुख्य कारण सूरज की रोशनी का बर्फ, धूल के कणों और बादलों से टकराना होता है। सर्दियों में जब हवा में नमी, बर्फ के कण और ऊँचाई पर मौजूद बादल मिलते हैं, तो सूर्य की किरणें लाल और नारंगी रंग में बिखर जाती हैं। इसी वजह से सुबह या…
लेह-लद्दाख के उच्च इलाकों में ठंडा मौसम और बर्फबारी जारी है और कुछ स्थानों पर बर्फबारी की ताज़ा रिपोर्टें मिल रही हैं। खासकर ऊँचे दर्रों और पहाड़ी क्षेत्रों में शीतलहर और हिमपात का असर देखा जा रहा है। • ज़ोजिला दर्रा और आसपास के हिस्सों में कुछ ताज़ी बर्फबारी हुई है जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। • द्रास और आसपास के इलाकों में बर्फ की सफ़ेद चादर दिखी है, जिससे वहाँ का नज़ारा बेहद खूबसूरत रहा है। • मौसम में बदलाव के साथ थोड़ा हल्का हिमपात भी आसपास के इलाकों में जारी है, जिससे कुल मिलाकर कड़ाके की ठंड महसूस…
केंद्र सरकार ने लद्दाख में प्रशासनिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए पाँच नए जिले—जांस्कर, द्रास, शम, नुब्रा और चांगथांग—बनाने का निर्णय लिया है। यह फैसला लद्दाख के दूर-दराज़ और दुर्गम इलाकों तक सरकारी सेवाएँ बेहतर ढंग से पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया है। नए जिलों के गठन से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी और स्थानीय लोगों को जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। लद्दाख जैसे भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन, प्रमाण-पत्र और आपात सेवाओं तक पहुँच बड़ी चुनौती रही है। नए जिलों के बनने से इन सुविधाओं का विकेंद्रीकरण होगा…
रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म ‘धुरंधर’ ने रिलीज़ के बाद से ही दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दमदार कहानी, शानदार निर्देशन और रणवीर सिंह के सशक्त अभिनय ने इस फिल्म को खास बना दिया है। भारत में अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के साथ-साथ यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। खास बात यह है कि ‘धुरंधर’ ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी बड़ी सफलता हासिल की है। पाकिस्तान सहित कई अन्य देशों में यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर टॉप ट्रेंडिंग में शामिल रही, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाता है। दर्शकों ने इसे…
पश्मीना शॉल भारत की पारंपरिक विरासत का एक अनमोल प्रतीक है। इसका मुख्य केंद्र लद्दाख और कश्मीर क्षेत्र माना जाता है। पश्मीना ऊन चांगथांगी नस्ल की बकरियों से प्राप्त होती है, जो लद्दाख के अत्यंत ठंडे और ऊँचे इलाकों में पाई जाती हैं। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए इन बकरियों के शरीर पर उगने वाली बेहद मुलायम ऊन ही पश्मीना कहलाती है। पश्मीना शॉल अपनी अत्यधिक कोमलता, गर्माहट और हल्के वजन के लिए विश्व-प्रसिद्ध है। इसे तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह हस्तनिर्मित होती है, जिसमें ऊन निकालने से लेकर कताई, बुनाई और कढ़ाई तक कई महीनों का…
लद्दाख (मुख्यतः लेह) में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठे। 24 सितंबर 2025 को विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, और सुरक्षा बलों द्वारा की गई फायरिंग में कम से कम चार लोग मारे गए तथा दर्जनों घायल हुए। कई प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय, सरकारी वाहनों और पुलिस वाहनों में आग लगाई और पत्थरबाज़ी भी की। प्रशासन ने बाद में काफी लोगों को हिरासत में लिया। प्रमुख गिरफ़्तारी और कार्रवाई:लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया…