जम्मू-कश्मीर में मानसून के सक्रिय होने और लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। बरसात के मौसम में जलजनित और संक्रामक बीमारियों के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवाइयां, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), जीवनरक्षक दवाएं, आईवी फ्लूड, एंटीबायोटिक्स और अन्य चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष ड्यूटी रोस्टर तैयार किए गए हैं, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
विभाग ने बताया कि मानसून के दौरान डायरिया, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, वायरल संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं। इसे देखते हुए सभी जिलों में निगरानी प्रणाली को सक्रिय कर दिया गया है। संदिग्ध मामलों की तुरंत रिपोर्टिंग और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
नगर निकायों और जलापूर्ति विभाग को पेयजल स्रोतों की नियमित जांच, क्लोरीनेशन, जलभराव वाले क्षेत्रों की सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से केवल उबला हुआ या शुद्ध पानी पीने, ताजा और स्वच्छ भोजन करने तथा खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने की अपील की है। साथ ही हाथों की नियमित सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
प्रशासन ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, दस्त, उल्टी, पेट दर्द या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लें और स्वयं दवा लेने से बचें।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क रहने तथा किसी भी संभावित स्वास्थ्य चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने नागरिकों से भी सहयोग और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है, ताकि मानसून के दौरान बीमारियों के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।