पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। स्थानीय पुलिस ने आरोप लगाया है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात आठ राजमार्ग पुलिसकर्मियों को प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर अगवा कर लिया। पुलिस के अनुसार, ये सभी कर्मचारी चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किए गए थे।
पुलिस प्रवक्ता खावर अली शौकत ने एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों की ओर से हमला किया गया और इसी दौरान आठ राजमार्ग पुलिसकर्मियों को कथित रूप से अपने कब्जे में ले लिया गया। पुलिस का दावा है कि इन कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हो सकी है।
पुलिस ने कथित रूप से अपहृत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाया गया तो मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने पहले से तनावपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
पीओके में पिछले कई सप्ताह से चुनाव और राजनीतिक मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया में कुछ प्रावधानों का विरोध किया है। क्षेत्र में हिंसक झड़पों के बाद कई इलाकों में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान भी टालना पड़ा।
स्थिति को देखते हुए चुनावी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा कराना बताई जा रही है। वहीं, विरोध-प्रदर्शन से जुड़े संगठनों और प्रशासन के बीच तनाव कम करने की चुनौती भी बनी हुई है।
इस घटना ने पीओके में कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और कथित रूप से लापता आठ कर्मचारियों की स्थिति तथा उनके ठिकाने का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।