जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मानसून के प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग द्वारा बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की संभावना जताए जाने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और जिलों में विशेष नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) चौबीसों घंटे कार्यरत हैं।
प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे बसे गांवों और भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि बारिश के कारण मार्ग बाधित होने की स्थिति में तुरंत राहत एवं बहाली का कार्य किया जा सके। आवश्यक मशीनरी, जेसीबी और सड़क मरम्मत दलों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।
राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, दवाइयों, एंबुलेंस और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को स्थिति की नियमित समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
इस बीच आम नागरिकों और पर्यटकों से मौसम विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। प्रशासन ने यह भी कहा है कि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय नियंत्रण कक्ष या आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन पर दें।
अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मानसून के पूरे मौसम के दौरान स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए जाएंगे, ताकि किसी भी चुनौती का समय रहते प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।