लद्दाख में 13वें लद्दाख मैराथन के आयोजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। दुनिया की सबसे ऊंचाई वाली प्रमाणित मैराथन प्रतियोगिताओं में शामिल इस आयोजन का आयोजन 10 से 13 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों और आयोजकों में उत्साह बढ़ रहा है। 17 अगस्त को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मैराथन की आधिकारिक जर्सी का अनावरण किया, जिसके साथ ही आयोजन की तैयारियों को औपचारिक रूप से गति मिली।
इस वर्ष प्रतियोगिता में छह अलग-अलग दौड़ शामिल हैं। इनमें 42 किलोमीटर की पूर्ण मैराथन, 21 किलोमीटर की अर्ध मैराथन, 11.2 किलोमीटर की दौड़ और पांच किलोमीटर की मनोरंजक दौड़ शामिल हैं। इसके अलावा 122 किलोमीटर की सिल्क रूट अल्ट्रा और 72 किलोमीटर की खारदुंग ला चुनौती जैसी कठिन अल्ट्रा दौड़ भी आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं में देश-विदेश के धावकों के भाग लेने की उम्मीद है।
लद्दाख मैराथन की सबसे बड़ी चुनौती यहां की अत्यधिक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन वाला वातावरण है। सामान्य मैराथन की तुलना में यहां भाग लेने वाले खिलाड़ियों को शरीर को ऊंचाई के वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए पर्याप्त समय देना पड़ता है। विशेष रूप से अल्ट्रा दौड़ में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों के लिए लेह में पहले पहुंचकर अनुकूलन करना अनिवार्य रखा गया है। आयोजकों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकीय जांच और पात्रता संबंधी नियम भी निर्धारित किए हैं।
लद्दाख प्रशासन इस आयोजन को केवल खेल प्रतियोगिता के रूप में नहीं देख रहा है। उपराज्यपाल ने इसे लद्दाख की पहचान, संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक पर्यटन को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। प्रशासन का मानना है कि मैराथन से स्थानीय युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और क्षेत्र में खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
लद्दाख मैराथन पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व देता है। आयोजन में एकल उपयोग वाली प्लास्टिक सामग्री को कम करने और पुन: उपयोग योग्य जलपान व्यवस्था को बढ़ावा देने जैसे कदम अपनाए जा रहे हैं। इससे खेल आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा।
सितंबर में होने वाली इस प्रतियोगिता से लद्दाख में खेल, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।