जम्मू-कश्मीर में आज “ऑपरेशन सिंदूर” की पहली वर्षगांठ पूरे सम्मान और सुरक्षा व्यवस्था के बीच मनाई गई। इस अवसर पर सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ देश की निर्णायक कार्रवाई को याद करते हुए शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां सेना और पुलिस अधिकारियों ने ऑपरेशन की सफलता और उसके महत्व पर चर्चा की।
“ऑपरेशन सिंदूर” को भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। पिछले वर्ष इसी दिन सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था, जिसमें कई आतंकियों को निष्क्रिय किया गया और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। इस अभियान ने सीमावर्ती इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई थी।
वर्षगांठ के मौके पर जम्मू, श्रीनगर, पुलवामा, बारामूला और राजौरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाए तथा प्रमुख बाजारों, बस अड्डों और धार्मिक स्थलों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से भी निगरानी बढ़ाई गई।
प्रशासन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास को बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की।
स्थानीय नागरिकों ने भी सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में शांति और सामान्य जीवन की स्थिति बेहतर हुई है।