लद्दाख की राजधानी लेह में चल रहा नौ दिवसीय लद्दाख पुस्तक महोत्सव शनिवार, 22 अगस्त को अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, लद्दाख प्रशासन और भारतीय सेना के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का आयोजन 14 से 22 अगस्त तक एनडीएस मेमोरियल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में किया गया। महोत्सव का उद्देश्य लद्दाख में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय साहित्य, कला, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को देश-दुनिया से जोड़ना रहा।
महोत्सव में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, लद्दाखी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की पुस्तकों के स्टॉल लगाए गए। देश के करीब 75 प्रकाशकों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया। इस दौरान विद्यार्थियों, युवाओं, लेखकों, साहित्यकारों और पुस्तक प्रेमियों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। आयोजकों ने बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया।
महोत्सव के दौरान साहित्यिक चर्चाओं के साथ कहानी लेखन, रचनात्मक लेखन, वाद-विवाद, पुस्तक निर्माण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सैन्य इतिहास और लद्दाख की विरासत से जुड़े सत्र भी आकर्षण का केंद्र रहे। एक कार्यक्रम में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने युद्धक्षेत्र से मिलने वाले नेतृत्व, साहस, धैर्य और सेवा के अनुभवों पर चर्चा की। विद्यार्थियों के लिए आयोजित अंतर-विद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता में तकनीक और पढ़ने की आदतों के प्रभाव पर विचार रखे गए।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 14 अगस्त को महोत्सव का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा था कि पुस्तकें सोच का विस्तार करती हैं और लोगों को नए विचारों से जोड़ती हैं। उन्होंने लद्दाख में हाल ही में शुरू की गई 70 पुस्तकालयों की पहल को भी पढ़ने की संस्कृति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
अंतिम दिन भी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से महोत्सव को यादगार बनाने की तैयारी है। नौ दिनों तक चले इस आयोजन ने लद्दाख में पुस्तकों, साहित्य, इतिहास और संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ स्थानीय समुदाय और देश के अन्य हिस्सों के बीच ज्ञान का संवाद मजबूत करने का अवसर दिया है।