केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले तथा दुर्गम क्षेत्रों में 1 सितंबर से जनगणना प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सामान्य क्षेत्रों की तुलना में इन इलाकों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण लोगों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। इसी वजह से इन क्षेत्रों में जनगणना का कार्य निर्धारित समय से पहले शुरू किया जाएगा, ताकि सभी नागरिकों का सही और व्यापक विवरण दर्ज किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों तथा जम्मू-कश्मीर के कई पर्वतीय क्षेत्रों में सितंबर के बाद मौसम तेजी से बदलने लगता है। भारी हिमपात के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट जाता है। ऐसे में जनगणना कर्मियों के लिए समय पर सर्वेक्षण पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किया है।
जनगणना के दौरान प्रशिक्षित गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्र करेंगे। इस बार डिजिटल तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे आंकड़ों का संग्रहण और सत्यापन अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी तरीके से हो सके। अधिकारियों को टैबलेट और अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि सूचनाओं का तत्काल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
प्रशासन ने बताया कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं होती, बल्कि इससे सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य विकास योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े प्राप्त होते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियां और संसाधनों का वितरण तय किया जाता है।
केंद्र सरकार ने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय प्रशासन भी जनगणना टीमों को आवश्यक सहयोग और सुरक्षा उपलब्ध कराएगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मियों को सही और पूर्ण जानकारी दें, ताकि विश्वसनीय आंकड़े तैयार किए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले शुरू होने वाली यह प्रक्रिया दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।