लद्दाख में इन दिनों राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही यहां के लोग लगातार अपनी पहचान, भूमि और संसाधनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अब यह मुद्दा एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk समेत कई स्थानीय संगठनों ने इस मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि छठी अनुसूची लागू होने से लद्दाख में जनजातीय समुदायों को विशेष अधिकार मिलेंगे, जिससे उनकी संस्कृति और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि राज्य का दर्जा मिलने से लद्दाख को बेहतर प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। अभी केंद्र के सीधे नियंत्रण के कारण कई फैसलों में स्थानीय हितों की अनदेखी होने का आरोप लगाया जा रहा है।
हाल ही में कई जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन, धरने और रैलियां आयोजित की गई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। युवाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी इस आंदोलन को और मजबूती दे रही है।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन मांगों पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। लेकिन बढ़ते जनदबाव के चलते आने वाले समय में सरकार को इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने पड़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग अब एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या इन मांगों को स्वीकार किया जाता है या नहीं।