जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग उनकी सरकार और पार्टी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आंदोलन और राजनीतिक प्रयास तब तक जारी रहेंगे, जब तक जम्मू-कश्मीर को उसका संवैधानिक अधिकार वापस नहीं मिल जाता।
हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के साथ विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है, लेकिन इससे राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कमजोर नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी पार्टी इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उठाती रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और जनजागरण अभियान अपने तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में विभाजित किए जाने के बाद से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठाई जाती रही है। उनका मानना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से प्रशासनिक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार विकास कार्यों, रोजगार सृजन, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल होना जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है। जनता और विभिन्न राजनीतिक संगठनों की नजर अब केंद्र सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई है।