लद्दाख के लिए गर्व का विषय बनते हुए स्वास्थ्य जागरूकता अधिकारी नूरुल इस्लाम को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान हिमालयी क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हेल्थ IEC (Information, Education and Communication) प्रैक्टिस अवॉर्ड के रूप में दिया गया है। यह पुरस्कार दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उनके अनुकरणीय प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। अत्यधिक ठंड, दूर-दराज़ बसे गांव और सीमित संसाधनों के बावजूद नूरुल इस्लाम ने स्वास्थ्य जागरूकता को जमीनी स्तर तक पहुँचाने का काम किया। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, टीबी और अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर प्रभावी अभियान चलाए।
उनकी खास उपलब्धि यह रही कि उन्होंने स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग कर लोगों को स्वास्थ्य संदेश समझाए। गांव-गांव जाकर जागरूकता शिविर, स्कूल कार्यक्रम और समुदाय आधारित बैठकों के माध्यम से उन्होंने आम लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग किया। इससे न केवल टीकाकरण दर में सुधार हुआ, बल्कि समय पर जांच और इलाज को लेकर लोगों का भरोसा भी बढ़ा।
राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान से यह स्पष्ट होता है कि लद्दाख जैसे दूरस्थ क्षेत्र में भी नवाचार और समर्पण से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नूरुल इस्लाम का कार्य अन्य पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों के लिए एक मॉडल बन सकता है। यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति की सफलता है, बल्कि लद्दाख में सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी है।