जम्मू-कश्मीर के दो प्रमुख जिलों — Pulwama और Budgam — में अवैध खनन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इसी संदर्भ में National Green Tribunal (NGT) ने एक संयुक्त समिति के गठन का निर्देश दिया है, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में हो रहे गैरकानूनी रेत और बजरी उत्खनन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।
अवैध खनन लंबे समय से इन जिलों में एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या के रूप में उभर रहा है। अनियंत्रित खनन गतिविधियों के कारण नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे जल स्तर में गिरावट, मिट्टी का कटाव और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, खनन के चलते आसपास के कृषि क्षेत्रों और ग्रामीण बस्तियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
NGT द्वारा गठित समिति को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर यह पता लगाए कि अवैध खनन किस स्तर तक हो रहा है और इससे पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा है। समिति अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने में भी सहायक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्षेत्र की जैव विविधता और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन द्वारा की गई यह पहल स्थानीय पर्यावरण की सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।