हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष सेब उत्पादकों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। मौसम की अनिश्चितता, कम पैदावार, बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार में मांग को लेकर असमंजस ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। शिमला की धाली फल मंडी में किसानों और कारोबारियों ने बताया कि इस वर्ष सेब की पैदावार में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को अपेक्षाकृत बेहतर कीमत मिल रही है, लेकिन कुल उत्पादन कम होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बना हुआ है।
बागवानों के अनुसार, फूल आने के समय बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और ठंड ने सेब की फल-स्थापना को प्रभावित किया। इसका सबसे ज्यादा असर निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देखने को मिला है। ऊंचाई वाले इलाकों में भी कई बागों में उत्पादन असमान रहा और फलों का आकार अपेक्षा से छोटा रहा। मौसम में अचानक बदलाव ने इस वर्ष की फसल की संभावनाओं को प्रभावित किया है।
किसानों के लिए बढ़ती लागत भी बड़ी समस्या बनी हुई है। बागों में खाद, दवाइयों, मजदूरी, पैकिंग और परिवहन पर खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत लगातार ऊपर जा रही है। ऐसे में कम फसल होने पर प्रति बाग कुल आय प्रभावित होना स्वाभाविक है।
हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को बाजार में करीब 3,000 से 3,500 रुपये प्रति 20 किलोग्राम पेटी तक कीमत मिलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन छोटे आकार के सेब और कमजोर मांग के कारण कारोबारियों के लाभ पर भी दबाव है।
किसानों का कहना है कि केवल ऊंची कीमत मिलना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उत्पादन में कमी और लागत बढ़ने से वास्तविक लाभ सीमित हो जाता है। कई बागवान सरकारी भुगतान लंबित होने की समस्या का भी सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ रही है।
सेब हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इस वर्ष की कम पैदावार का असर केवल बागवानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, पैकिंग, मंडी कारोबार और अन्य संबंधित गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार मौसम संबंधी नुकसान, बढ़ती लागत और बाजार की चुनौतियों को देखते हुए उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगी।