जम्मू-कश्मीर में वर्ष 1990 के एक चर्चित दोहरे हत्याकांड की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य जांच एजेंसी ने कश्मीरी पंडित कवि, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सर्वानंद कौल प्रेमी तथा उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्या से जुड़े मामले में जम्मू-कश्मीर के नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई तीन दशक से अधिक पुराने मामले में साक्ष्य जुटाने और घटना के पीछे शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने के उद्देश्य से की गई।
सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके 27 वर्षीय बेटे वीरेंद्र का मई 1990 में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव सोफ शाली से कथित तौर पर अपहरण किया गया था। बाद में दोनों की हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस दौर की है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा का दौर तेज हो रहा था और कश्मीरी पंडित समुदाय के कई लोगों को निशाना बनाया गया था।
एसआईए की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े पुराने साक्ष्यों की दोबारा जांच करना और संभावित आरोपियों तथा साजिश में शामिल लोगों तक पहुंचना है। एजेंसी ने विभिन्न स्थानों पर तलाशी के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की। अधिकारियों को उम्मीद है कि नई जांच से लंबे समय से लंबित इस मामले में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
यह मामला अनंतनाग जिले के डोरू थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मामले का पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया था। अब एसआईए द्वारा जांच को दोबारा गति दिए जाने से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
जम्मू-कश्मीर में पुराने आतंकवाद संबंधी मामलों की दोबारा जांच का उद्देश्य उन घटनाओं में जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना है। प्रेमी और उनके बेटे की हत्या का मामला भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में तलाशी के दौरान मिले संभावित साक्ष्यों और जांच की प्रगति के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।