भारत सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कराए गए चुनावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “दिखावटी चुनाव” करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा वहां किसी भी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया या प्रशासनिक गतिविधि का कोई कानूनी या वैध आधार नहीं है। भारत ने दोहराया कि पाकिस्तान का उस क्षेत्र पर अवैध कब्जा है और इस तरह के चुनाव वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान समय-समय पर ऐसे चुनाव आयोजित कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आभास देने की कोशिश करता है, लेकिन इससे उसकी अवैध मौजूदगी को वैधता नहीं मिल सकती। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को चुनाव कराने के बजाय पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों पर अपना अवैध कब्जा समाप्त करना चाहिए।
सरकार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों के अधिकारों और विकास से जुड़े मुद्दों पर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। भारत का आरोप है कि वहां लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्थानीय नागरिकों के हितों से जुड़े कई विषय लंबे समय से चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में केवल चुनाव आयोजित करना इन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में उसका रुख स्पष्ट, स्थिर और अपरिवर्तित है तथा किसी भी बाहरी गतिविधि से इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा।
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि भारत ने एक बार फिर अपने संवैधानिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण को दोहराते हुए यह संदेश दिया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से जुड़े मामलों में उसकी स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। वहीं क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपना पक्ष मजबूती से रखता रहेगा। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होगा।