केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। सरकार के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लिए ₹154.57 करोड़ और लद्दाख के लिए ₹33.49 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस निवेश का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, आधुनिक सुविधाओं का विकास करना और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि करना है।
केंद्र सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य पालन को आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के तहत मत्स्य बीज उत्पादन, आधुनिक हैचरी, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयों, परिवहन सुविधाओं और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
जम्मू-कश्मीर में स्वीकृत राशि का उपयोग मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को विकसित करने, जलाशयों का बेहतर उपयोग करने और मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाएगा। वहीं लद्दाख जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में ठंडे पानी की मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण, आधुनिक ट्राउट फार्मों के विकास और स्थानीय मत्स्य पालकों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य क्षेत्र को नई गति मिलेगी। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और बाजार तक आसान पहुंच मिलने से स्थानीय मछुआरों और उद्यमियों की आय बढ़ने की संभावना है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश में “नीली अर्थव्यवस्था” को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से मत्स्य उत्पादन में वृद्धि, निर्यात को प्रोत्साहन और मत्स्य संसाधनों के टिकाऊ विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए स्वीकृत यह वित्तीय सहायता क्षेत्र के मत्स्य उद्योग को नई दिशा देने के साथ-साथ स्थानीय किसानों, मछुआरों और युवाओं के लिए आर्थिक प्रगति के नए द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।