जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में बदलते मौसम और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए बागवानी विभाग ने किसानों के लिए विस्तृत परामर्श जारी किया है। विभाग ने सेब की फसल को रोगों, कीटों और मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस समय बागों की नियमित निगरानी और समय पर प्रबंधन से उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बागवानी विभाग के अनुसार, लगातार नमी और वर्षा के कारण सेब के बागों में फफूंदजनित रोगों और कीटों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में किसानों को समय-समय पर पेड़ों का निरीक्षण करने, संक्रमित पत्तियों और फलों को हटाने तथा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही स्वीकृत दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। विभाग ने बिना आवश्यकता या विशेषज्ञ सलाह के किसी भी रसायन के प्रयोग से बचने को भी कहा है।
अधिकारियों ने किसानों को बागों में जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी है। इसके लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने और नालियों की नियमित सफाई करने पर विशेष जोर दिया गया है। अधिक समय तक पानी जमा रहने से पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
विभाग ने यह भी सुझाव दिया है कि किसान मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखें और बारिश या तेज हवाओं की संभावना को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्यों की योजना बनाएं। फलों की तुड़ाई केवल मौसम अनुकूल होने पर ही करने की सलाह दी गई है, ताकि फलों की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता बनी रहे।
विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों, संतुलित पोषण प्रबंधन और नियमित छंटाई जैसी वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। इसके साथ ही बागवानी विभाग के स्थानीय कार्यालयों और कृषि विशेषज्ञों से समय-समय पर संपर्क बनाए रखने की अपील की गई है।
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है और लाखों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में विभाग का मानना है कि यदि किसान समय पर जारी की गई सलाह का पालन करते हैं, तो मौसम की चुनौतियों के बावजूद फसल को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता वाले सेब प्राप्त किए जा सकते हैं।