जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में आगामी जनगणना को अधिक पारदर्शी, सटीक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से डिजिटल जनगणना प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस बार जनगणना में पारंपरिक कागजी प्रक्रिया के बजाय डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे आंकड़ों के संग्रहण और विश्लेषण में काफी सुविधा होगी।
जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में फील्ड स्तर पर कर्मचारियों और गणनाकारों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें टैबलेट और मोबाइल आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया समझाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से आंकड़ों की शुद्धता बढ़ेगी और जानकारी को रियल टाइम में अपडेट करना संभव होगा।
प्रशासन ने बताया कि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों और जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में भी जनगणना कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
डिजिटल जनगणना के माध्यम से जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। ये आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के बेहतर वितरण और सरकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे जनगणना कर्मियों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि क्षेत्र की वास्तविक जनसांख्यिकीय तस्वीर सामने आ सके। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से जनगणना प्रक्रिया अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में डिजिटल जनगणना का सफल क्रियान्वयन प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिससे भविष्य में विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी।