श्रीनगर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के परिवार को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने का झांसा देकर लाखों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ श्रीनगर की उप-न्यायाधीश अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत दर्ज प्राथमिकी संख्या 25/2026 से जुड़ा है।
आर्थिक अपराध शाखा के अनुसार, शिकायतकर्ता की पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं और उनके इलाज के लिए महंगी दवाइयों की आवश्यकता थी। इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि वह दवाइयां बाजार की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा सकता है। आरोपी की बात पर विश्वास करते हुए शिकायतकर्ता ने दवाइयां खरीदने के लिए उसे लाखों रुपये दे दिए। हालांकि, आरोप है कि पैसे लेने के बाद आरोपी ने न तो दवाइयां उपलब्ध कराईं और न ही रकम वापस की।
शिकायत मिलने के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की जांच शुरू की। जांच एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी और शिकायतकर्ता एक-दूसरे को पहले से जानते थे और चार दशक से भी अधिक समय पहले एक ही बोर्डिंग स्कूल में साथ पढ़ते थे। पुलिस के अनुसार, इसी पुराने परिचय और भरोसे का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
जांच पूरी होने के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने अदालत में आरोपपत्र पेश कर दिया है। हालांकि, आरोपी को दोषी ठहराने या निर्दोष घोषित करने का अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।
अपराध शाखा ने इस घटना के बाद लोगों से आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में सतर्क रहने की अपील की है। खासतौर पर बीमारी के इलाज के लिए असामान्य रूप से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के दावों की पहले पूरी तरह जांच करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जानकारी आर्थिक अपराध शाखा को देने को कहा है।