देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर आने वाले अज्ञात लिंक से सावधान रहने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं और फर्जी लिंक के माध्यम से बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड तथा अन्य व्यक्तिगत डेटा चोरी करने का प्रयास कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, हाल के महीनों में व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एसएमएस के जरिए भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक से जुड़े मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। कई लोगों को नौकरी, लॉटरी, बैंक अपडेट, केवाईसी सत्यापन, सरकारी योजना या पार्सल डिलीवरी के नाम पर लिंक भेजे जाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता है, वह फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है या उसके मोबाइल फोन में हानिकारक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी अक्सर सरकारी संस्थानों, बैंकों या प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का इस्तेमाल करके लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे ओटीपी, बैंक खाता विवरण, डेबिट कार्ड नंबर और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल कर आर्थिक धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। यदि कोई संदेश संदिग्ध लगे तो उसे तुरंत अनदेखा करें और संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से जानकारी प्राप्त करें। साथ ही मोबाइल और कंप्यूटर में सुरक्षा अपडेट तथा एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उनका मानना है कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। समय रहते सावधानी बरतकर लोग अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं।