जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने और उन्हें भड़काऊ तथा भ्रामक सामग्री उपलब्ध कराने वाले संदिग्ध नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली है कि कुछ तत्व इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर युवाओं को गलत दिशा में प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए साइबर निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया आज युवाओं के बीच संवाद और जानकारी का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में कुछ असामाजिक तत्व इसका दुरुपयोग कर झूठी खबरें, भ्रामक प्रचार और समाज में अस्थिरता पैदा करने वाली सामग्री प्रसारित करने का प्रयास कर सकते हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने के लिए आधुनिक तकनीक और साइबर जांच उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां विभिन्न सोशल मीडिया खातों, ऑनलाइन समूहों और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं। यदि किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच का उद्देश्य आम नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अनावश्यक निगरानी नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को बनाए रखना है।
पुलिस ने युवाओं और अभिभावकों से भी सतर्क रहने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाली किसी भी संदिग्ध या भड़काऊ सामग्री को बिना सत्यापन के साझा न करें। साथ ही, यदि किसी को ऐसी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर जागरूकता बेहद आवश्यक है। सही जानकारी और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के माध्यम से समाज को भ्रामक प्रचार और दुष्प्रचार से बचाया जा सकता है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि युवाओं की सुरक्षा और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।