लद्दाख की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हुई हालिया वार्ता के बाद असंतोष बढ़ गया है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों के साथ 9 सितंबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में कोई ठोस प्रगति नहीं होने का आरोप लगाया गया। पर्यावरण कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य सोनम वांगचुक ने बैठक के बाद निराशा जताते हुए कहा कि पिछली बैठक के करीब चार महीने बाद भी चर्चा लगभग वहीं खड़ी है।
वांगचुक के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद थी कि गृह मंत्रालय की उपसमिति प्रस्तावित निर्वाचित संस्था से संबंधित मसौदा सामने रखेगी। इस संस्था की संरचना, अधिकार और कार्यक्षेत्र को लेकर लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। हालांकि बैठक में अपेक्षित मसौदा प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बजाय अगले दौर की बातचीत के लिए कई सवाल रखे गए।
लद्दाख के प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना, राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय लोगों के भूमि, रोजगार, संस्कृति तथा पर्यावरण संबंधी हितों की रक्षा शामिल है। प्रतिनिधि यह भी चाहते हैं कि निर्वाचित संस्था को वास्तविक अधिकार दिए जाएं, ताकि प्रशासन और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
वांगचुक ने यह भी संकेत दिया कि यदि आगे भी ठोस पहल नहीं हुई तो लद्दाख में आंदोलन फिर शुरू हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने सरकार को सितंबर के मध्य तक भरोसेमंद आश्वासन देने का समय दिया है और 19 सितंबर से आंदोलन की चेतावनी दी है।
केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत आगे भी जारी रहने की संभावना है। अब सभी की नजर अगले दौर की वार्ता और प्रस्तावित निर्वाचित संस्था के मसौदे पर है। लद्दाख में यह उम्मीद बनी हुई है कि बातचीत के जरिए राजनीतिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाला जाएगा।