लद्दाख की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर केंद्र सरकार ने प्रतिनिधियों से धैर्य रखने की अपील की है। नई दिल्ली में लद्दाख के प्रतिनिधियों और गृह मंत्रालय के बीच हुई हालिया बातचीत में केंद्र की ओर से कहा गया कि सरकार क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से एक निर्वाचित विधायी व्यवस्था, भूमि, रोजगार, संस्कृति, भाषा और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा तथा स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक अधिकार देने की मांग कर रहे हैं। लद्दाख को वर्ष 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, लेकिन वहां विधानसभा का गठन नहीं किया गया। इसके बाद से लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस इन मांगों को लेकर केंद्र के साथ बातचीत कर रहे हैं।
हालिया बातचीत में केंद्र की ओर से संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत लद्दाख के लिए विशेष और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की संभावना पर चर्चा हुई। हालांकि प्रतिनिधियों को अभी तक प्रस्तावित व्यवस्था का विस्तृत मसौदा नहीं मिला है। केंद्र के अनुसार इस प्रकार की संवैधानिक व्यवस्था लागू करने के लिए संसद में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी, इसलिए इसमें समय लग सकता है।
दूसरी ओर, लद्दाख के प्रतिनिधियों में बातचीत की धीमी गति को लेकर नाराजगी है। सोनम वांगचुक ने कहा है कि पिछली बैठकों की तुलना में इस बार भी कोई विशेष ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने निर्वाचित संस्था के गठन और उसके अधिकारों को स्पष्ट करने के लिए जल्द विधेयक लाने की मांग की है।
वांगचुक ने यह भी संकेत दिया है कि यदि सरकार की ओर से जल्द भरोसेमंद आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन फिर तेज किया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार प्रस्तावित राजनीतिक व्यवस्था का मसौदा कब सामने रखती है और लद्दाख की मांगों पर किस तरह आगे बढ़ती है।