लद्दाख की आर्थिक और वित्तीय स्थिति को लेकर नीति आयोग की हालिया समीक्षा बैठक में राजस्व जुटाने और सरकारी खर्च के बीच बढ़ते अंतर पर चिंता जताई गई है। 29 अगस्त को हुई बैठक में लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने केंद्रशासित प्रदेश की वित्तीय स्थिति, बजट आवंटन, राजस्व संग्रह, कर एवं गैर-कर आय, वस्तु एवं सेवा कर संग्रह और बिजली क्षेत्र से जुड़े वित्तीय मामलों की जानकारी दी।
बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक के. लाहिड़ी ने की। इसमें लद्दाख के आर्थिक विकास के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, संपर्क व्यवस्था, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, जल और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वित्तीय स्थिति की समीक्षा के दौरान राजस्व संग्रह बढ़ाने और सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
लद्दाख एक पर्वतीय और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास, सड़क और बिजली व्यवस्था, दूरसंचार, जल आपूर्ति तथा अन्य आवश्यक सेवाओं पर खर्च अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त राजस्व जुटाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। बैठक में इसी अंतर को कम करने के लिए वित्तीय प्रबंधन और राजस्व वसूली की क्षमता मजबूत करने पर चर्चा हुई।
बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति भी समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। बिजली क्षेत्र में राजस्व वसूली और कार्यकुशलता बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया। इसके अलावा अक्षय ऊर्जा, विशेषकर विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन और बिजली के जाल से जुड़ी योजनाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
नीति आयोग ने लद्दाख की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्यटन, स्थानीय उत्पादों, उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। समुद्री हिरनपदी, खुबानी और पश्मीना जैसे स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बेहतर विपणन पर भी जोर दिया गया।
कुल मिलाकर, राजस्व और खर्च के बीच अंतर को कम करना लद्दाख के दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीति आयोग की समीक्षा से उम्मीद है कि केंद्र और लद्दाख प्रशासन मिलकर ऐसी रणनीति तैयार करेंगे, जिससे राजस्व बढ़े, खर्च अधिक प्रभावी हो और विकास योजनाओं के लिए वित्तीय आधार मजबूत किया जा सके।