लद्दाख में नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे को रोकने और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए नशामुक्ति जागरूकता अभियान तेज किया जा रहा है। प्रशासन, पुलिस, सामाजिक कल्याण विभाग और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी से अलग-अलग क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखने के साथ-साथ प्रभावित लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाओं की जानकारी देना है।
लद्दाख के खल्त्से क्षेत्र में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को नशीले पदार्थों के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों और उनके सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए लोगों से रोकथाम के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी की अपील की। विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों और उनके दुष्परिणामों के बारे में भी जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए परिवार, विद्यालय, प्रशासन, पुलिस और स्थानीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा। युवाओं को शिक्षा, खेल और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रह सकें।
लेह में भी नशामुक्त भारत सप्ताह के दौरान व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के तहत चांगथांग क्षेत्र में बच्चों और अभिभावकों के लिए कार्यक्रम किए गए। जिला नशामुक्ति केंद्र ने उपचार और परामर्श सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
प्रशासन का कहना है कि नशामुक्त समाज बनाने के लिए लगातार जागरूकता और सामुदायिक सहयोग जरूरी है। अभियान के माध्यम से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नशे के खिलाफ आवाज उठाएं और जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार तथा पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करें।