लेह। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में गांव स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े नायबदारों यानी ग्राम प्रमुखों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नायबदारों के मासिक मानदेय को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने को मंजूरी दी है। इस फैसले से लद्दाख के 247 नायबदारों को लाभ मिलेगा। प्रशासन के अनुसार, यह बढ़ोतरी 233 प्रतिशत से अधिक है और पिछले करीब दस वर्षों में पहली बार उनके मानदेय में संशोधन किया गया है।
लद्दाख में नायबदारों को स्थानीय स्तर पर ‘गोबा’ के नाम से भी जाना जाता है। ये गांवों और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण संपर्क का काम करते हैं। गांवों में सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने, स्थानीय समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और विकास कार्यों से संबंधित जरूरतों को सामने रखने में उनकी भूमिका रहती है। विशेष रूप से दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सीधा संपर्क बनाए रखने में नायबदारों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रशासन के मुताबिक, मानदेय बढ़ाने का फैसला नायबदारों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद लिया गया। उपराज्यपाल के गांवों के दौरे के दौरान भी कई नायबदारों ने मानदेय बढ़ाने की मांग रखी थी। 19 सितंबर को विभिन्न गांवों के नायबदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी उपराज्यपाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें सामने रखी थीं। इसके बाद मामले की समीक्षा के निर्देश दिए गए।
लद्दाख प्रशासन का कहना है कि नायबदारों की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और वे सरकारी सेवाओं तथा विकास योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं। हाल के वर्षों में जलापूर्ति और अन्य स्थानीय समस्याओं को सामने लाने में भी उनकी जानकारी का इस्तेमाल किया गया है।
संशोधित मानदेय जम्मू-कश्मीर लंबरदारी अधिनियम, 1972 और संबंधित नियमों के प्रावधानों के तहत तय किया गया है। नया मानदेय आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होगा।