लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने एक बार फिर केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों की समस्याओं का समाधान केवल शांतिपूर्ण संवाद के जरिए ही संभव है। वांगचुक ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ समय से बातचीत की प्रक्रिया रुकी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे मुद्दों को उठाया। वांगचुक का कहना है कि इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है, ताकि क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके और लोगों की पहचान व संस्कृति सुरक्षित रह सके।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका मानना है कि लद्दाख एक नाजुक पारिस्थितिकी वाला क्षेत्र है, जहां अनियंत्रित विकास से पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों और पर्यावरणीय प्रभावों का ध्यान रखना चाहिए।
वांगचुक ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ जल्द से जल्द वार्ता शुरू करे और लंबित मुद्दों का समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि संवाद ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इसके माध्यम से ही सभी पक्षों के हितों को संतुलित किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने भी वांगचुक की इस पहल का समर्थन किया है और उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही सकारात्मक कदम उठाएगी।