लद्दाख में प्रसिद्ध पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। वांगचुक और उनके समर्थक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। हाल के दिनों में इस आंदोलन ने नई गति पकड़ ली है, जिससे केंद्र सरकार पर दबाव भी बढ़ा है।
वांगचुक का कहना है कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संवैधानिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद स्थानीय लोगों की भागीदारी निर्णय प्रक्रिया में कम हो गई है। इसी वजह से रोजगार, भूमि अधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर चिंता बढ़ी है।
आंदोलन के तहत वांगचुक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उपवास का सहारा लिया है। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, छात्र और सामाजिक संगठन भी जुड़ते जा रहे हैं। लेह और आसपास के क्षेत्रों में रैलियां और धरने लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
केंद्र सरकार ने अब तक इस मामले पर सीमित प्रतिक्रिया दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही प्रतिनिधियों से बातचीत कर सकती है। वहीं, लद्दाख के लोगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन आने वाले समय में राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई हैं।