लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी ने केंद्र सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज मामलों को वापस लेने तथा प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। दोनों पक्षों का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन की अगली रणनीति पर विचार किया जाएगा।
लेह में आयोजित एक बैठक के दौरान आंदोलन के प्रतिनिधियों ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आंदोलन में शामिल लोगों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने आंदोलन के दौरान अपने परिजनों को खोया है, उन्हें न्याय के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए ताकि सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख से जुड़े विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय और प्रशासनिक मुद्दों पर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालेगी। लेह एपेक्स बॉडी के पदाधिकारियों ने भी कहा कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद और सहमति के जरिए समाधान प्राप्त करना है।
इस बीच प्रशासन ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले एक महीने के दौरान केंद्र सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। यदि बातचीत सकारात्मक रही, तो विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकल सकता है। वहीं, मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में आंदोलन का अगला चरण शुरू होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।