केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सड़क संपर्क को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लगभग ₹9,800 करोड़ की लागत वाली दो प्रमुख सुरंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश में हर मौसम में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना, यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाना तथा सामरिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि इन सुरंगों के निर्माण से जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षभर आवाजाही संभव हो सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों सुरंग परियोजनाएं आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के आधार पर विकसित की जाएंगी। इनके निर्माण से बर्फबारी, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण अक्सर बंद रहने वाले मार्गों पर निर्भरता कम होगी। इससे लोगों को लंबी दूरी तय करने में कम समय लगेगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से पर्यटन, व्यापार, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। जम्मू-कश्मीर के सेब, अखरोट, केसर और अन्य कृषि उत्पादों को देश के विभिन्न बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा। इससे स्थानीय किसानों और व्यापारियों की आय बढ़ने की संभावना है। साथ ही पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हो सकती है, जिससे होटल, परिवहन और अन्य सेवा क्षेत्रों को नई गति मिलेगी।
सामरिक दृष्टि से भी इन सुरंगों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से सीमावर्ती क्षेत्रों तक सुरक्षा बलों और आवश्यक संसाधनों की आवाजाही अधिक तेज और प्रभावी होगी। आपदा या आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को भी तेजी से संचालित किया जा सकेगा।
निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ₹9,800 करोड़ की ये सुरंग परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे के विकास में मील का पत्थर साबित होंगी। इनके पूरा होने से प्रदेश में हर मौसम में सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध होगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।