भारत ने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक समुद्री सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया। सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक सुरक्षित समुद्री मार्गों पर निर्भर करती है, इसलिए समुद्री क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और कानून आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।
भारत ने अपने संबोधन में कहा कि हिंद महासागर और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन मार्गों के माध्यम से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधनों, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं का परिवहन होता है। ऐसे में समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध गतिविधियों और क्षेत्रीय संघर्षों से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक क्षेत्र का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता से जुड़ा हुआ मुद्दा है। भारत ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही समुद्री आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और समुद्री प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत बताई।
G7 सम्मेलन में शामिल विभिन्न देशों के नेताओं ने भी वैश्विक समुद्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण विषय माना और इस दिशा में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में कई समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियों के कारण यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत लंबे समय से ‘सुरक्षित और मुक्त समुद्री क्षेत्र’ की अवधारणा का समर्थन करता रहा है। देश का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक आर्थिक विकास के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। G7 मंच पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना भारत की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।