लद्दाख से सटे इलाकों में चीन द्वारा किए गए नए प्रशासनिक कदम को लेकर भारत ने आधिकारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया है। हाल ही में चीन ने अपने शिनजियांग (Xinjiang) क्षेत्र के अंतर्गत कुछ नए प्रशासनिक जिले/काउंटियां बनाने की घोषणा की, जिनमें वे इलाके भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्हें भारत अपने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा मानता है। इस कदम को भारत ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत चीन के ऐसे किसी भी एकतरफा फैसले को स्वीकार नहीं करता, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास या विवादित क्षेत्रों में यथास्थिति को बदलने की कोशिश करता हो। भारत का रुख है कि नाम बदलने या नए प्रशासनिक ढांचे खड़े करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती और भारत अपने दावे पर कायम है।
यह मुद्दा ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है, ताकि सीमा पर तनाव को कम किया जा सके। ऐसे में चीन का यह कदम आपसी विश्वास के माहौल पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक घोषणाएं केवल कागजी होती हैं, लेकिन इनका राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश काफी बड़ा होता है।
भारत ने यह भी दोहराया कि सीमा विवाद का समाधान केवल बातचीत और आपसी सहमति से ही संभव है, न कि एकतरफा फैसलों से। लद्दाख भारत के लिए न केवल रणनीतिक रूप से अहम है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का भी अहम प्रतीक है।
कुल मिलाकर, चीन की इस नई प्रशासनिक पहल ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों में संवेदनशीलता को उजागर किया है और यह साफ कर दिया है कि लद्दाख के मुद्दे पर भारत किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।