जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादकों और व्यापारियों ने अमरनाथ यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (एनएच-44) पर फलों से लदे ट्रकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह राजमार्ग कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है और सेब, चेरी, खुबानी तथा अन्य ताज़े फलों की समय पर ढुलाई के लिए इसकी सुचारु आवाजाही अत्यंत आवश्यक है। यदि यात्रा के दौरान लंबे समय तक यातायात बाधित रहता है, तो किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फल उत्पादकों के संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि अमरनाथ यात्रा और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उनका सुझाव है कि फलों से लदे ट्रकों के लिए निर्धारित समय या अलग यातायात व्यवस्था बनाई जाए, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा भी प्रभावित न हो और कृषि उत्पाद समय पर देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंच सकें।
कश्मीर इस समय चेरी और अन्य मौसमी फलों के विपणन का महत्वपूर्ण दौर देख रहा है, जबकि आने वाले महीनों में सेब की फसल की ढुलाई भी शुरू होगी। ऐसे में समय पर परिवहन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। व्यापारियों का कहना है कि फल जल्दी खराब होने वाली उपज है और यदि ट्रक कई घंटों या दिनों तक राजमार्ग पर फंसे रहते हैं, तो गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे बेहतर कीमत नहीं मिल पाती।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं तथा कृषि उत्पादों की आपूर्ति को भी प्राथमिकता दी जाएगी। संबंधित विभाग यातायात की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और जरूरत के अनुसार ट्रैफिक प्रबंधन में बदलाव किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरनाथ यात्रा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, वहीं बागवानी क्षेत्र जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। इसलिए दोनों आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि प्रशासन प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन और समन्वय सुनिश्चित करता है, तो श्रद्धालुओं की यात्रा भी सुचारु रहेगी और किसानों के फलों की समय पर देशभर की मंडियों तक आपूर्ति भी बनी रहेगी।