जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े धार्मिक विद्वानों के संगठन मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने सामाजिक समस्याओं को लेकर दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए हैं। श्रीनगर में मंगलवार को आयोजित एक दिवसीय उलेमा सम्मेलन और सीरत सम्मेलन में नशे के बढ़ते दुरुपयोग, शराब, आत्महत्या, मानसिक तनाव, सामाजिक माध्यमों के अनुचित इस्तेमाल, कमजोर होते पारिवारिक संबंधों और पर्यावरणीय नुकसान जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। सम्मेलन की अध्यक्षता मीरवाइज उमर फारूक ने की। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों से 70 से अधिक उलेमा और धार्मिक विद्वानों ने हिस्सा लिया।
पहले प्रस्ताव में नशीले पदार्थों और अन्य प्रकार के व्यसनों को लेकर चिंता जताई गई। धार्मिक विद्वानों ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, धार्मिक संस्थानों और समाज को मिलकर काम करने की जरूरत है। सम्मेलन में शराब की उपलब्धता और उसके प्रचार को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई तथा सरकार से इस संबंध में अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की अपील की गई।
आत्महत्या और आत्महानि के बढ़ते मामलों को लेकर भी सम्मेलन में विशेष चर्चा हुई। प्रस्ताव में कहा गया कि मानसिक और भावनात्मक परेशानी से गुजर रहे युवाओं तथा परिवारों को बिना किसी सामाजिक डर के अपनी समस्याएं साझा करने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उलेमा, मस्जिदों और मदरसों से जरूरतमंद लोगों को उचित परामर्श और पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंचाने में सहयोग करने की बात कही गई।
पर्यावरण संरक्षण को भी धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया। प्लास्टिक और पॉलीथीन के इस्तेमाल, कूड़ा फैलाने तथा झीलों और जलस्रोतों में कचरा डालने से बचने की अपील की गई। डल झील, वुलर झील और निगीन झील समेत जलस्रोतों के संरक्षण पर भी जोर दिया गया।
संगठन ने सामाजिक मुद्दों पर नियमित जागरूकता के लिए विभिन्न मस्जिदों में समन्वित शुक्रवार के उपदेश और जिलास्तर पर नियमित बैठकें आयोजित करने का निर्णय भी लिया है। दूसरे प्रस्ताव में मुस्लिम समुदाय के भीतर एकता, आपसी सम्मान और विभिन्न धार्मिक मतों के बीच सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया गया।