जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पारंपरिक उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय व्यापारियों, किसानों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है। कश्मीर के प्रसिद्ध सेब, सूखे मेवे और केसर के साथ-साथ लद्दाख के विश्वप्रसिद्ध पश्मीना उत्पादों की मांग देश और विदेश के बाजारों में लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचने से होटल, परिवहन, रेस्तरां, हस्तशिल्प बाजार और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी अच्छा लाभ मिल रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के कारण स्थानीय उत्पादों की बिक्री में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, लेह और नुब्रा घाटी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटक स्मृति चिन्ह के रूप में केसर, अखरोट, बादाम, सूखे मेवे, हस्तशिल्प वस्तुएं और पश्मीना शॉल की खरीदारी कर रहे हैं। इससे स्थानीय बाजारों में रौनक बढ़ी है और छोटे व्यापारियों की आय में भी वृद्धि हुई है।
बागवानी और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता, पारंपरिक शिल्पकला और भौगोलिक पहचान वाले उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता से इन क्षेत्रों को नई पहचान मिल रही है। सरकार भी किसानों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक विपणन, पैकेजिंग और डिजिटल माध्यमों से अपने उत्पाद देश-विदेश तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है।
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि होटल, टैक्सी सेवा, स्थानीय परिवहन, भोजनालय और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे हजारों स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्यटन, बागवानी और हस्तशिल्प क्षेत्रों को इसी प्रकार प्रोत्साहन मिलता रहा, तो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। इससे क्षेत्र के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी और स्थानीय समुदायों की आय में भी निरंतर वृद्धि होने की उम्मीद है।