भारतीय उद्योग जगत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और डेटा सेंटर सेक्टर को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश देखने को मिल सकता है। सरकार की नीतियों, डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलने से कंपनियां इन सेक्टरों में तेजी से विस्तार की तैयारी कर रही हैं।
EV सेक्टर में बढ़ती मांग को देखते हुए कई ऑटोमोबाइल कंपनियां नए इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं। बैटरी निर्माण, चार्जिंग स्टेशन और EV कंपोनेंट से जुड़े कारोबार में भी निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ने से लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। सरकार भी FAME और अन्य योजनाओं के जरिए इस सेक्टर को प्रोत्साहन दे रही है।
वहीं दूसरी ओर डेटा सेंटर सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। भारत में इंटरनेट उपयोग, क्लाउड सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा स्टोरेज की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी को देखते हुए घरेलू और विदेशी कंपनियां बड़े डेटा सेंटर स्थापित करने में निवेश बढ़ा रही हैं। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, नोएडा और पुणे जैसे शहर डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि EV और डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे। इसके साथ ही भारत को तकनीक और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाने में भी मदद मिल सकती है। निवेशकों की नजर अब इन तेजी से उभरते क्षेत्रों पर बनी हुई है।