केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा जरूरतों को भविष्य के अनुरूप मजबूत बनाने और “विकसित भारत” मिशन को गति देने के लिए नई रणनीतियों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत आने वाले वर्षों में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और उद्योग, परिवहन तथा घरेलू जरूरतों के लिए स्थिर एवं सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सके।
ऊर्जा मंत्रालय और संबंधित विभागों के बीच हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को तेज करने और ऊर्जा भंडारण प्रणाली को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई। सरकार सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भी प्राथमिकता दे रही है। इसके जरिए भारत को स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार देश में तेजी से बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए नई ट्रांसमिशन लाइनें, आधुनिक ग्रिड सिस्टम और स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन तकनीक विकसित की जा रही हैं। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक निर्बाध बिजली पहुंचाने और उद्योगों को बेहतर ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दे रही है।
“विकसित भारत” मिशन के तहत सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन को भी इसमें शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत ऊर्जा ढांचा भारत की आर्थिक प्रगति की रीढ़ साबित होगा।
सरकार ने निजी कंपनियों और विदेशी निवेशकों को भी ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि इन नई रणनीतियों से आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।