जम्मू-कश्मीर में लागू स्वास्थ्य योजना SEHAT को लेकर निजी अस्पतालों ने सरकार से बड़ा बदलाव करने की मांग की है। प्रदेश के कई निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों ने कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए योजना को “Insurance Mode” में बदला जाना चाहिए। अस्पतालों का मानना है कि इससे मरीजों और अस्पतालों दोनों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।
निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के अनुसार मौजूदा SEHAT योजना में भुगतान प्रक्रिया काफी धीमी है। कई अस्पतालों का करोड़ों रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित पड़ा है, जिससे अस्पतालों के संचालन पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान न मिलने से डॉक्टरों, कर्मचारियों और मेडिकल सुविधाओं को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
अस्पताल संचालकों ने सुझाव दिया कि यदि योजना को पूरी तरह इंश्योरेंस मॉडल पर लागू किया जाए तो क्लेम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो जाएगी। इससे मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा भी पहले से अधिक सुचारु रूप से मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि Insurance Mode लागू होने से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और दूरदराज़ इलाकों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल पाएंगी।
इस मुद्दे को लेकर निजी अस्पताल संगठनों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। अधिकारियों ने अस्पतालों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने का आश्वासन दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
SEHAT योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल है, जिसके तहत लाखों लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।