लद्दाख में प्रस्तावित बिजली संयुक्त परियोजना (Power Joint Venture Project) को लेकर नया विवाद सामने आया है। प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने इस परियोजना का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि यह योजना लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय संसाधनों और लोगों के अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
सोनम वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले स्थानीय जनता से पर्याप्त चर्चा किए बिना लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख एक संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र है, जहां बड़े स्तर की औद्योगिक और ऊर्जा परियोजनाएं पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकती हैं। विशेष रूप से जल स्रोतों, हिमनदों और पारंपरिक जीवनशैली पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है।
वांगचुक ने यह भी कहा कि लद्दाख के लोगों को विकास चाहिए, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति और संस्कृति दोनों की रक्षा करे। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी बड़ी परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय समुदायों की सहमति और पर्यावरण विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जाए।
इस मुद्दे पर कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी समर्थन जताया है। सोशल मीडिया पर “Save Ladakh” और “Sustainable Development” जैसे अभियान फिर से चर्चा में आ गए हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लद्दाख में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच इस विषय पर और बातचीत होने की संभावना है।