लद्दाख में शिया मुस्लिम समुदाय ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में शोक सभाएं आयोजित की गईं। धार्मिक नेताओं और समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों ने उन्हें एक प्रभावशाली आध्यात्मिक मार्गदर्शक और मुस्लिम जगत की प्रमुख आवाज़ बताया।
लेह और करगिल सहित कई इलाकों में मस्जिदों और इमामबारगाहों में विशेष दुआ और मजलिस का आयोजन किया गया। लोगों ने काले बैनर लगाए और शोक प्रकट करने के लिए जुलूस भी निकाले। समुदाय के नेताओं ने कहा कि खामेनेई ने न केवल ईरान में बल्कि पूरी दुनिया में शिया मुसलमानों के बीच एकता और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास किया।
स्थानीय धार्मिक विद्वानों ने अपने संबोधन में कहा कि खामेनेई का जीवन सादगी, संघर्ष और नेतृत्व का प्रतीक था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख अपनाया और मुस्लिम देशों के अधिकारों की आवाज़ बुलंद की। लद्दाख के शिया समुदाय ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
प्रशासन की ओर से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे आने वाले दिनों में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि देते रहेंगे।
खामेनेई के निधन को शिया समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि उनका प्रभाव केवल एक देश तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर धार्मिक और सामाजिक विचारधारा को प्रभावित किया।