श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में नशीली दवाओं की तस्करी के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा और प्रवर्तन एजेंसियों ने समन्वित कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। श्रीनगर में हुई केंद्र शासित प्रदेश स्तर की संयुक्त समन्वय समिति की बैठक में दोनों क्षेत्रों में सक्रिय तस्करी के नेटवर्क, अंतरराज्यीय संपर्क और अवैध नशीली फसलों की खेती से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई।
बैठक में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जम्मू-कश्मीर पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय, सीमा सुरक्षा बल, खुफिया ब्यूरो, सीमा शुल्क विभाग, राजस्व खुफिया निदेशालय और राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी के बदलते तरीकों और अलग-अलग राज्यों से जुड़े तस्करी नेटवर्क की जानकारी साझा की।
अधिकारियों का जोर ऐसे नेटवर्क को केवल स्थानीय स्तर पर पकड़ने के बजाय उसके पूरे ढांचे को समझकर कार्रवाई करने पर रहा। इसके लिए सूचना साझा करने, संयुक्त जांच, संदिग्धों से संयुक्त पूछताछ और तस्करी से जुड़े आर्थिक लेनदेन की जांच को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। एजेंसियां तस्करी से होने वाले धन के प्रवाह का पता लगाकर नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की दिशा में भी काम करेंगी।
लद्दाख में भी प्रशासन ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ जिला स्तर पर कार्रवाई तेज की है। हाल में खाल्त्सी और द्रास में हुई बैठकों में युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने, जागरूकता बढ़ाने तथा विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
बैठक में वर्ष 2026-29 के लिए तैयार नशीली दवाओं पर नियंत्रण संबंधी राष्ट्रीय दृष्टिपत्र को लागू करने पर भी चर्चा हुई। एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे रोकने और समाप्त करने पर केंद्रित होगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए अब लगातार संयुक्त कार्रवाई और सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान को प्राथमिकता दी जाएगी।