जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में सरकारी कोष से 1.38 करोड़ रुपये से अधिक की कथित हेराफेरी के मामले में अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा ने 10 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला धर्मारी उप-कोषागार से सरकारी धन के कथित गलत हस्तांतरण और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोपपत्र रियासी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया है।
अपराध शाखा के अनुसार, मामले में 1,38,17,971 रुपये की राशि के कथित गबन और निजी बैंक खातों में हस्तांतरण की जांच की गई। जांच में कोषागार की ऑनलाइन व्यवस्था के साथ कथित छेड़छाड़, पेंशन और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़े जाली बिल तथा भुगतान संबंधी दस्तावेज तैयार करने और उनके इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं।
यह मामला वर्ष 2024 में अरनास थाने में रियासी के जिला कोषाधिकारी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। बाद में विस्तृत जांच के लिए इसे अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दिया गया। जांच अधिकारियों ने कोषागार के अभिलेखों, बैंक खातों में हुए लेन-देन, बिलों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की। संदिग्ध दस्तावेजों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भी भेजा गया था। अपराध शाखा के अनुसार, वैज्ञानिक जांच और अन्य दस्तावेजी तथा मौखिक साक्ष्यों से कथित जाली बिलों और वाउचरों की भूमिका सामने आई।
मामले में अली हुसैन शाह, बलबीर सिंह और अजीत कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आरोप स्थापित किए जाने की बात अपराध शाखा ने कही है।
इसके अलावा अरशद-ए-आजम, अबरार-ए-आजम, रूबीना कौसर, मोहम्मद रफीक, शौकत अली, मोहम्मद अशरफ और नसीब मोहम्मद समेत सात अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित तौर पर सरकारी धन को गलत तरीके से प्राप्त करने और रखने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
अपराध शाखा ने कहा है कि मामले की जांच अभी खुली हुई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धन की और कितनी राशि का कथित रूप से दुरुपयोग हुआ तथा इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई अदालत में होगी।