श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के मानसून सत्र में बिजली दरों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर मंगलवार को सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सरकार ने सदन में बताया कि बिजली शुल्क में 6.83 प्रतिशत की वृद्धि से वित्त वर्ष 2026-27 में बिजली वितरण कंपनियों को लगभग 251 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। यह बढ़ी हुई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू हुई हैं।
यह जानकारी हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन के सवाल के जवाब में बिजली विकास विभाग की ओर से दी गई। सरकार के अनुसार, संयुक्त विद्युत नियामक आयोग की ओर से स्वीकृत शुल्क संशोधन का उद्देश्य बिजली आपूर्ति की लागत और वितरण कंपनियों से प्राप्त राजस्व के बीच बने अंतर को कम करना तथा उनकी वार्षिक राजस्व आवश्यकता को पूरा करना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि शुल्क बढ़ाने के बावजूद बिजली खरीद की लागत को पूरा करने के लिए उसे वितरण कंपनियों को 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी देनी होगी। इससे बिजली क्षेत्र में सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव का भी पता चलता है।
विधानसभा में बिजली विभाग से जुड़े बकाये का मुद्दा भी सामने आया। सरकार के अनुसार जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों पर बिजली शुल्क का लगभग 4,385.30 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, कश्मीर घाटी में घरेलू उपभोक्ताओं से 2025-26 में 1,455.90 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 1,238.07 करोड़ रुपये से अधिक था।
सरकार ने पात्र अंत्योदय अन्न योजना परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना की भी जानकारी दी। इसके लिए पीएम सूर्य घर योजना के तहत छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पात्र परिवारों को इसका लाभ संयंत्रों के चालू होने के बाद मिलने की बात कही गई है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी का मुद्दा विधानसभा में उपभोक्ताओं के खर्च और सरकार की सब्सिडी व्यवस्था से जुड़ा प्रमुख विषय बना हुआ है।