लेह। लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण की मांग को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बुधवार, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह कार्यक्रम पहले प्रस्तावित लंबी पदयात्रा के स्थान पर आयोजित किया जा रहा है। मौसम में बदलाव और रात के समय बढ़ती ठंड को देखते हुए कार्यक्रम को छोटा किया गया है।
वांगचुक के अनुसार, यह पदयात्रा लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी मांगों को सामने रखने का माध्यम होगी। पदयात्रा में खारू गांव के लोगों के साथ अन्य स्थानीय नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम का उद्देश्य लद्दाख के लिए लंबे समय से उठाई जा रही संवैधानिक और राजनीतिक मांगों को फिर से प्रमुखता से सामने लाना है।
लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के पीछे स्थानीय समूहों का तर्क है कि इससे क्षेत्र की भूमि, संस्कृति, जनजातीय पहचान और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक व्यवस्था मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रही है।
पदयात्रा के बाद 24 सितंबर को शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम पिछले वर्ष लेह में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए चार लोगों की पहली बरसी के अवसर पर रखा गया है। पिछले वर्ष के प्रदर्शनों में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और राज्य के दर्जे की मांग प्रमुख मुद्दे थे।
लद्दाख के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से केंद्र के साथ बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की प्रक्रिया भी जारी रही है। हालांकि, हाल की बैठकों में प्रमुख मांगों पर ठोस सहमति नहीं बन पाने की बात आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कही है। ऐसे में 23 सितंबर की पदयात्रा को लद्दाख की मांगों को दोबारा सार्वजनिक मंच पर रखने वाले कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।