लद्दाख की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने 19 से 24 सितंबर तक छह दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की है। यह कदम केंद्र सरकार के साथ 9 सितंबर को हुई बातचीत में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के बाद उठाया गया है। दोनों संगठनों का कहना है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस मसौदा या स्पष्ट आश्वासन सामने नहीं आया।
लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा, भूमि और रोजगार से जुड़े अधिकार तथा अधिक प्रभावी लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। प्रतिनिधियों की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जाती रही है। इसके अलावा 2025 में हुई हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने और पीड़ित परिवारों को न्याय तथा मुआवजा देने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।
लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि केंद्र की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो प्रस्तावित पदयात्रा के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठनों का कहना है कि वे चाहते हैं कि किसी निर्वाचित लोकतांत्रिक व्यवस्था के गठन से पहले भूमि और स्थानीय प्रशासन से जुड़े बड़े तथा अपरिवर्तनीय फैसले न लिए जाएं।
वहीं, लद्दाख प्रशासन का कहना है कि केंद्र और प्रतिनिधियों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में लद्दाख के लिए एक निर्वाचित निकाय को विधायी, कार्यकारी और वित्तीय अधिकार देने पर चर्चा हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया के लिए संसद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
अब 19 सितंबर से प्रस्तावित पदयात्रा पर सबकी नजर है। केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच आगे होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि आंदोलन आगे बढ़ता है या दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंचते हैं।