लद्दाख के भविष्य के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। इसी क्रम में लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) ने गृह मंत्रालय की ओर से पूछे गए सवालों पर अपना जवाब तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संगठन इस काम में कानूनी विशेषज्ञों की मदद ले रहा है और प्रस्तावित व्यवस्था से जुड़े विभिन्न संवैधानिक तथा प्रशासनिक पहलुओं पर विचार कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए प्रस्तावित संघ शासित क्षेत्र स्तर की निर्वाचित संस्था के स्वरूप, अधिकारों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर स्थानीय प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं। चर्चा में प्रस्तावित संस्था और मौजूदा स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों के बीच अधिकारों के बंटवारे सहित कई मुद्दे शामिल हैं।
एलएबी अब इन सवालों का अध्ययन कर विशेषज्ञों के साथ अपनी राय तैयार कर रहा है। संगठन की ओर से तैयार जवाब को अक्टूबर में होने वाली अगली बैठक में रखा जा सकता है। इससे बातचीत के अगले चरण में लद्दाख के प्रतिनिधियों का पक्ष अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की उम्मीद है।
इस बीच लद्दाख प्रशासन ने भी कहा है कि केंद्र और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच संवैधानिक सुरक्षा तथा प्रस्तावित राजनीतिक व्यवस्था को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संघ शासित क्षेत्र स्तर पर एक निर्वाचित संस्था बनाने के विकल्प पर चर्चा हुई है। इसके अधिकारों और संरचना को लेकर कई विषयों पर सहमति और स्पष्टता की जरूरत है।
एलएबी लंबे समय से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और भूमि तथा रोजगार से जुड़े अधिकारों की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, केंद्र की ओर से प्रस्तावित नई व्यवस्था के स्वरूप को लेकर बातचीत अभी जारी है और अंतिम ढांचा सामने आना बाकी है।
अक्टूबर की बैठक इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण हो सकती है। एलएबी द्वारा कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर तैयार किया जा रहा जवाब केंद्र के सवालों पर संगठन की स्थिति और अपेक्षाओं को स्पष्ट करने का माध्यम बनेगा। इसके बाद बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर लद्दाख के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर रहेगी।